गुस्ताख़ी माफ़ हो !
यह हमारी चौपाल है। अपनी बात कहने के लिए इससे अच्छी जगह कोई नहीं , लम्बी चुप्पी के बाद एक बार फिर साथ बैठ कर कुछ कहते है कुछ सुनते हैं।
यह हमारी चौपाल है। अपनी बात कहने के लिए इससे अच्छी जगह कोई नहीं , लम्बी चुप्पी के बाद एक बार फिर साथ बैठ कर कुछ कहते है कुछ सुनते हैं।
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