Friday, March 7, 2014

गुस्ताख़ी माफ़ हो !
यह हमारी चौपाल है।  अपनी बात कहने के लिए इससे अच्छी जगह कोई नहीं , लम्बी चुप्पी के बाद एक बार फिर साथ बैठ कर कुछ कहते है कुछ सुनते हैं।

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